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पिता के लौटने का था इंतज़ार, तिरंगे में लिपटकर आए ‘शहीद’; 3 माह के मासूम ने दी मुखाग्नि

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 बालाघाट लांजी, मध्यप्रदेश : नियति का क्रूर खेल देखिए, जिस आंगन में अगले महीने बेटे के नामकरण की खुशियां गूंजने वाली थीं, वहां आज मातम का सन्नाटा पसरा है। मध्यप्रदेश के बालाघाट (लांजी) में तैनात सीआरपीएफ 7वीं बटालियन के जवान देवनारायण दरों का पार्थिव शरीर जब उनके गृहग्राम आमाडुला पहुँचा, तो हर आंख छलक उठी। सबसे कारुणिक दृश्य तब दिखा जब उनके तीन माह के मासूम बेटे ने अपने पिता को मुखाग्नि दी।

नामकरण के लिए आना था घर, पर नियति को कुछ और ही मंजूर था

परिजनों ने रुंधे गले से बताया कि देवनारायण अगले महीने (जनवरी) में अपने दुधमुंहे बेटे के नामकरण संस्कार के लिए छुट्टी लेकर घर आने वाले थे। घर में उत्सव की तैयारियां चल रही थीं, ढाई साल की बेटी अपने पिता की राह देख रही थी, लेकिन खुशियों के दस्तक देने से पहले ही काल ने दरवाजे पर दस्तक दे दी।

ड्यूटी पर जाते समय बिगड़ी तबीयत

सीआरपीएफ से मिली जानकारी के अनुसार, मंगलवार सुबह जब देवनारायण अपनी ड्यूटी के लिए तैयार हो रहे थे, तभी अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। साथी जवान उन्हें तुरंत अस्पताल ले गए, लेकिन नियति ने अपना फैसला सुना दिया था। चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया; प्रारंभिक जांच में मौत का कारण हार्ट अटैक बताया गया है।

राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई

जवान का पार्थिव शरीर गांव पहुंचते ही पूरा इलाका ‘भारत माता की जय’ और ‘देवनारायण अमर रहें’ के नारों से गूंज उठा।

  • गार्ड ऑफ ऑनर: सीआरपीएफ के जवानों और अफसरों ने अपने साथी को गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम सलामी दी।

  • अंतिम संस्कार: राजकीय सम्मान के साथ उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई, जिसमें हजारों की संख्या में ग्रामीण और स्थानीय लोग शामिल हुए।

“एक तरफ देश सेवा का जज्बा और दूसरी तरफ पिता का अधूरा फर्ज—तिरंगे में लिपटे देवनारायण को देख हर ग्रामीण की रूह कांप गई।”

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