KORBA: कोरबा के वरिष्ठ पत्रकार और समाजसेवी स्वर्गीय जसराज जैन के असामयिक निधन से पूरा शहर शोक में डूब गया है। उनके सम्मान में पुरानी बस्ती स्थित सियान सदन में शोक सभा आयोजित की गई, जिसमें कोरबा के जनप्रतिनिधियों, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने भारी संख्या में भाग लेकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।


जसराज जैन की पत्रकारिता और सामाजिक सेवा को किया गया याद
कार्यक्रम की शुरुआत में स्व. जसराज जैन के पुत्र सुनील जैन ने अपने पिता के अंतिम क्षणों को याद करते हुए भावुक शब्दों में बताया कि, पिता पूरी तरह स्वस्थ थे, लेकिन रायपुर में अचानक तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाते समय उन्होंने दम तोड़ दिया। डॉक्टर ने हार्ट अटैक की पुष्टि की। उनका जाना हमारे परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है।

सहयोगी और सहकर्मियों ने साझा किए संस्मरण
मूरीत राम साहू (श्रमिक नेता)- मैं जब भी आंदोलनों में होता था, जसराज जी मेरे साथ खड़े रहते थे। वे कोरबा की समस्याओं को लेकर बेहद गंभीर थे और पत्रकारिता के माध्यम से आम जनता की आवाज को प्रशासन तक पहुंचाते थे।

केदारनाथ अग्रवाल- जसराज जैन ने कोरबा के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने जिस प्रकार की पत्रकारिता की, वह आज भी मार्गदर्शक है। समाज उनकी कमी हमेशा महसूस करेगा।

रफीक मेमन (वरिष्ठ पत्रकार)- उनके साथ का रिश्ता पारिवारिक था। वे मेरे लिए मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत थे। उनका जाना मेरी व्यक्तिगत क्षति है।
सनत दास दीवान (वरिष्ठ पत्रकार व संचालनकर्ता)– वे मेरे लिए पिता तुल्य थे। हर पीढ़ी के साथ संवाद करने की उनकी शैली उन्हें विशेष बनाती थी।
धरम निर्मले (पूर्व पार्षद)- बुधवारी बाजार का ग्रीन ज़ोन आज भी जस का तस है, इसका श्रेय स्व. जसराज जैन को जाता है जिन्होंने पर्यावरण संरक्षण को लेकर पत्राचार किया और अवैध अलॉटमेंट को रोका। वे पत्रकार ही नहीं, पर्यावरण प्रेमी भी थे।
वरिष्ठ पत्रकार और समाजसेवियों की उपस्थिति
कार्यक्रम को वरिष्ठ पत्रकार विश्वनाथ केडिया, बोध सिंह ठाकुर, विमल कुमार थवाईत, बजरंग सोनी, एहसान खान, खगेश्वर सिंह, प्रदीप जायसवाल, श्याम बिहारी, शिव शंकर अग्रवाल, गुड्डा सिंह, अब्दुल गनी मेमन, रघु दीवान समेत बड़ी संख्या में लोगों ने संबोधित किया और स्व. जसराज जैन को श्रद्धांजलि दी।
एक युग का अंत
जसराज जैन न केवल पत्रकार थे, बल्कि समाज के सजग प्रहरी भी थे। उन्होंने पत्रकारिता को जनसेवा का माध्यम बनाया। उनकी धारदार लेखनी, निष्पक्ष विचार और समाज के प्रति समर्पण उन्हें आज भी लोगों के दिलों में जीवित रखेगा।








