Latest News
कोरबा: रावण दहन के बाद मुड़ापार में खूनी वारदात, चाकू के वार से युवक की मौत; जांच में जुटी पुलिस बच्चों की सेहत और पोषण को नया आयाम देगा छत्तीसगढ़ स्टेट पेडीकॉन 2026: कोरबा में 23 से 25 अक्टूबर तक जुटेगा देशभर के बाल रोग विशेषज्ञों का महाकुंभ कैबिनेट मंत्री लखन लाल देवांगन की मौजूदगी में 120 फीट ऊंचे रावण का दहन, HTPS कोरबा के लाल मैदान में भव्य दशहरा उत्सव पुराना बस स्टैंड में धूमधाम से मनाया गया विजयादशमी का पर्व, जय श्रीराम के जयघोष के साथ हुआ रावण दहन कोरबा में भीषण सड़क हादसा: तेज रफ्तार बस ने स्कूटी सवार दोस्तों को रौंदा, मौके पर ही दर्दनाक मौत अंकिता शर्मा ने AK-47 से की टेस्ट फायरिंग, राजनांदगांव में विजयादशमी पर पुलिस शस्त्रागार में हुआ विधि-विधान से शस्त्र पूजन
Home » देश » चुनावी हलफनामे में झूठी जानकारी मामला: अब आम नागरिक भी उम्मीदवार के खिलाफ दर्ज करा सकेंगे आपराधिक शिकायत, सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

चुनावी हलफनामे में झूठी जानकारी मामला: अब आम नागरिक भी उम्मीदवार के खिलाफ दर्ज करा सकेंगे आपराधिक शिकायत, सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

Share:

नई दिल्ली 17 अक्टूबर 202 6Supreme Court: चुनावों में पारदर्शिता और नेताओं की जवाबदेही तय करने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई उम्मीदवार चुनाव नामांकन के दौरान दाखिल हलफनामे (Affidavit) में गलत जानकारी देता है या महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाता है, तो देश का कोई भी आम नागरिक उसके खिलाफ सीधे आपराधिक शिकायत दर्ज करा सकता है।

अदालत ने यह भी साफ किया कि ऐसे मामलों में निजी शिकायत दर्ज कराने के लिए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की पूर्व अनुमति या मंजूरी की कोई आवश्यकता नहीं होगी।

फैसले के मुख्य बिंदु:

  • चुनाव आयोग की निर्भरता खत्म: सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने कहा कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (RPA) की धारा 125A के तहत शिकायत दर्ज कराने के लिए नागरिकों को अब पूरी तरह चुनाव आयोग पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है।

  • CrPC की धारा 195 लागू नहीं: पीठ ने स्पष्ट किया कि धारा 125A के तहत दायर निजी शिकायतों पर आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 195 का प्रतिबंध लागू नहीं होता। (धारा 195 आमतौर पर सरकारी अधिकारियों की लिखित शिकायत के बिना अदालतों को सीधे संज्ञान लेने से रोकती है)। अदालत के अनुसार, विधायकों/उम्मीदवारों के झूठे हलफनामे पर संसद ने जानबूझकर यह छूट दी है।

  • फर्जी शिकायतों पर सुरक्षा: शीर्ष अदालत ने यह भी ध्यान रखा कि इस अधिकार का दुरुपयोग न हो। यदि कोई व्यक्ति किसी निर्वाचित प्रतिनिधि को परेशान करने के इरादे से बेबुनियाद या झूठी शिकायत दर्ज कराता है, तो सक्षम मजिस्ट्रेट मामले के तथ्यों के आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई या आदेश दे सकते हैं।

क्या था पूरा मामला?

यह मामला कर्नाटक के बीदर विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित विधायक शैलेंद्र बेल्दाले और शिकायतकर्ता राजकुमार मदकी से जुड़ा है।

  • आरोप: राजकुमार मदकी ने आरोप लगाया था कि 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान विधायक बेल्दाले ने अपने चुनावी हलफनामे में अपने आवासीय पते की गलत जानकारी दी थी।

  • निचली अदालत से हाईकोर्ट तक: मदकी ने बंगलूरू के मजिस्ट्रेट कोर्ट में CrPC की धारा 200 के तहत निजी आपराधिक शिकायत दर्ज कराई। हालांकि, 7 मार्च 2025 को कर्नाटक हाईकोर्ट ने इस शिकायत को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि ऐसी शिकायत केवल चुनाव आयोग के माध्यम से ही दर्ज कराई जानी चाहिए या मतदाता चुनाव याचिका (Election Petition) का रास्ता अपना सकते हैं।

  • सुप्रीम कोर्ट का रुख: हाईकोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए मदकी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी सिद्धांत पर मदकी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए माना कि आम नागरिक को शिकायत का अधिकार है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस विशिष्ट मामले में विधायक बेल्दाले के खिलाफ पहले से रद्द कार्यवाही को दोबारा शुरू न करने का निर्णय लिया।

नेताओं के लिए क्या बदलेगा?

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद चुनाव लड़ने वाले नेताओं और जनप्रतिनिधियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अब संपत्ति, आपराधिक रिकॉर्ड, शैक्षणिक योग्यता या पते से संबंधित गलत जानकारी देने पर न सिर्फ विरोधी बल्कि कोई भी जागरूक नागरिक सीधे अदालत का दरवाजा खटखटा सकेगा, जिससे चुनावी हलफनामे में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।