2027 से 16.7% तक बढ़ेगी कारों की फ्यूल एफिशिएंसी
नई दिल्ली 1 अक्टूबर 2026 CAFE Rules : केंद्र सरकार ने देश में बिकने वाली पैसेंजर गाड़ियों की फ्यूल एफिशिएंसी में बड़ा सुधार करने के लिए नए कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल इकोनॉमी (CAFE) नियम जारी कर दिए हैं। ये नए नियम 1 अप्रैल 2027 से 31 मार्च 2032 तक यानी पांच वर्षों की अवधि के लिए प्रभावी रहेंगे। इनका मुख्य उद्देश्य भारत में निर्मित और आयात (Import) होने वाली नई पैसेंजर गाड़ियों की ईंधन दक्षता में चरणबद्ध तरीके से सुधार करना और कार्बन उत्सर्जन को कम करना है।

नए CAFE नियमों की प्रमुख बातें:
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16.7% तक बेहतर होगी ईंधन दक्षता: सरकार ने 2027-28 के लिए ईंधन खपत का शुरुआती बेंचमार्क 3.9960 लीटर/100 किमी तय किया है, जिसे चरणबद्ध तरीके से घटाकर 2031-32 तक 3.3273 लीटर/100 किमी पर लाया जाएगा। इससे गाड़ियों का औसत माइलेज काफी बेहतर होगा।
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गाड़ियों के वजन के आधार पर लक्ष्य: वाहन के वजन के हिसाब से अलग-अलग लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। भारी वाहनों (जैसे SUV) को ज्यादा फ्यूल-एफिशिएंट बनाना होगा, जबकि हल्की गाड़ियों के लिए मानक अपेक्षाकृत सरल होंगे। इसके अलावा, रेफरेंस वजन को भी 1,082 किग्रा से बढ़ाकर 1,229 किग्रा (13.6% बढ़ोतरी) कर दिया गया है।
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EV और हाइब्रिड गाड़ियों को ‘सुपर क्रेडिट’: कंपनियों के फ्लीट एवरेज की गणना में बैटरी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (BEVs), प्लग-इन हाइब्रिड और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को सुपर क्रेडिट का लाभ मिलेगा। इसमें सबसे ज्यादा प्राथमिकता इलेक्ट्रिक वाहनों को दी गई है, जबकि हाइब्रिड और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को अलग-अलग स्तर पर क्रेडिट मिलेगा।
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12 ईंधन-बचत तकनीकों को मान्यता: CAFE लक्ष्यों को आसान बनाने के लिए मान्यता प्राप्त तकनीकों की संख्या 4 से बढ़ाकर 12 कर दी गई है। इनमें स्टार्ट/स्टॉप सिस्टम, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम (TPMS) और रीजेनरेटिव ब्रेकिंग जैसी उन्नत तकनीकें शामिल हैं।
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कंपनियों को कंप्लायंस में फ्लेक्सिबिलिटी: वाहन निर्माताओं को 2 या 3 साल के ‘कंप्लायंस ब्लॉक’ के भीतर अपने लक्ष्य पूरे करने की छूट दी गई है, जिससे उन्हें टेक्नोलॉजी अपडेट करने का समय मिलेगा। इसके अतिरिक्त, 1,000 यूनिट्स प्रति वर्ष से कम बिक्री करने वाले छोटे वाहन निर्माताओं को CAFE के फ्लीट एवरेज नियमों से छूट प्रदान की गई है।



