चंडीगढ़ 31 जुलाई: पंजाब कांग्रेस में विधानसभा चुनाव से पहले गुटबाजी थमने का नाम नहीं ले रही है। पार्टी हाईकमान की लाख कोशिशों के बावजूद प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के बीच की खींचतान खुलकर सामने आ रही है। ताजा मामला बुधवार का है, जब लोकसभा में एंटी पेपर लीक बहस के दौरान राहुल गांधी के संबोधन में पंजाब के 7 में से 6 सांसद मौजूद थे, लेकिन चरणजीत सिंह चन्नी सदन से नदारद रहे।

लोकसभा से अनुपस्थित रहकर फरीदकोट धरने में पहुंचे चन्नी
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस संसदीय दल और अमृतसर सांसद गुरजीत सिंह औजला की ओर से सभी सांसदों को दोपहर 12 बजे सदन में मौजूद रहने का व्हाट्सएप संदेश भेजा गया था। इसके बावजूद सांसद चरणजीत सिंह चन्नी संसद में शामिल होने के बजाय पंजाब के फरीदकोट में बाबा फरीद यूनिवर्सिटी के बाहर फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक के खिलाफ कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करते दिखे।
वड़िंग गुट ने बनाई दूरी, खुलकर सामने आई गुटबाजी
फरीदकोट के इस कार्यक्रम ने पंजाब कांग्रेस की आंतरिक कलह को एक बार फिर उजागर कर दिया है। इस विरोध प्रदर्शन से प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के गुट ने पूरी तरह दूरी बनाए रखी।
प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर जारी है रार
विधानसभा चुनाव से पहले यह अटकलें थीं कि पार्टी प्रदेश अध्यक्ष का चेहरा बदल सकती है। हालांकि, हाईकमान द्वारा जारी सूची में अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को इस पद पर बरकरार रखा गया, जिसके बाद से चन्नी गुट ने कथित तौर पर बगावत के सुर तेज कर दिए हैं।
इस अंदरूनी कलह को थामने के लिए पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल को हस्तक्षेप करना पड़ा था। भूपेश बघेल ने दोटूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया था कि प्रदेश अध्यक्ष को बदला नहीं जाएगा और यह “गुड़िया-गुड्डे का खेल” नहीं है। बावजूद इसके, दोनों नेताओं के बीच की दूरी पार्टी के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
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