मुंबई 1 नवंबर 2026 Maharashtra politics : महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर दोनों शिवसेनाओं (शिंदे गुट और उद्धव गुट) के एक साथ आने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। शिवसेना (शिंदे गुट) के विधान परिषद सदस्य (MLC) हेमंत पाटिल के एक ताजा और बेहद सनसनीखेज बयान ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में बड़ी हलचल पैदा कर दी है। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) इस बयान के बाद सियासी गलियारों में यह सवाल सबसे बड़ा बन गया है कि क्या जिन दो धड़ों ने एक-दूसरे के खिलाफ जंग लड़ी थी, वे भविष्य में फिर से हाथ मिला सकते हैं?

राजनीति में कुछ भी संभव: “जिंदगी भर जिनके खिलाफ हथियार उठाए, आज साथ बैठने का वक्त”
हेमंत पाटिल ने राजनीति के अनिश्चित और अप्रत्याशित स्वभाव पर खुलकर बात की। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि राजनीति में कभी भी कुछ भी हो सकता है। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) इस दौरान उन्होंने एक बहुत बड़ा राजनीतिक सच बयां करते हुए कहा कि “जिंदगी भर जिनके खिलाफ हथियार उठाए, आज उन्हीं के साथ बैठने का वक्त आ चुका है।”
दोनों शिवसेनाओं के एकजुट होने के फैसले पर उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संबंध में मुख्यमंत्री/नेता एकनाथ शिंदे जो भी योग्य फैसला लेंगे, वह फैसला पार्टी के सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को पूरी तरह से मान्य होगा।
जमीनी हकीकत: आम शिवसैनिकों का आपसी प्यार और नांदेड का दर्द
पाटिल ने जमीनी स्तर पर काम करने वाले शिवसैनिकों के आपसी संबंधों का जिक्र करते हुए एक अहम बात रखी। उन्होंने कहा कि भले ही पार्टी टूट चुकी है और दो अलग-अलग शिवसेनाएं बन चुकी हैं, लेकिन आम शिवसैनिकों के बीच एक-दूसरे के प्रति आत्मीयता और लगाव का भाव आज भी वैसा ही बना हुआ है। शिवसैनिक आज भी एक-दूसरे के सुख-दुख में बढ़-चढ़कर शामिल होते हैं।
उन्होंने नांदेड जिले की स्थिति का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि यदि शिवसेना अंदर से एक होती, (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) तो आज पूरे महाराष्ट्र और खासतौर पर नांदेड में पार्टी और कार्यकर्ताओं को जिस कड़े संघर्ष और परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, वह नौबत कभी नहीं आती।
भाजपा से स्थानीय मतभेद और पालकमंत्री को सीधी सलाह
बयान के दौरान हेमंत पाटिल ने सत्ताधारी महायुति गठबंधन में शामिल भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिवसेना के रिश्तों पर भी अपनी बेबाक राय रखी। उन्होंने खुले तौर पर स्वीकार किया कि जमीनी व स्थानीय स्तर पर भाजपा और शिवसेना के बीच निश्चित रूप से मतभेद और मनमुटाव मौजूद हैं।
इन मतभेदों को दूर करने का सुझाव देते हुए उन्होंने कहा कि जो भी जिले के पालकमंत्री हैं, उन्हें खुद पहल करके आगे आना चाहिए और इन स्थानीय विवादों को तुरंत सुलझाना चाहिए ताकि कार्यकर्ताओं में सामंजस्य बन सके।
महायुति गठबंधन पर रुख और वरिष्ठ नेताओं को चेतावनी
गठबंधन की मौजूदा स्थिति के बारे में स्पष्टीकरण देते हुए पाटिल ने कहा कि फिलहाल महायुति गठबंधन में कोई बहुत बड़ी दरार या खटास नहीं पड़ी है। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) हालांकि, उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में यह भी जोड़ा कि यदि समय रहते इन छोटी-छोटी स्थानीय परेशानियों को दूर नहीं किया गया, तो भविष्य में दिक्कतें बढ़ सकती हैं, इसलिए वरिष्ठ नेताओं को इस स्थिति पर समय रहते ध्यान देने की सख्त जरूरत है।
क्या है बड़ा सवाल?
हेमंत पाटिल के इस सस्पेंस से भरे बयान ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आने वाले दिनों में शिंदे गुट और उद्धव ठाकरे गुट के बीच अंदरखाने कोई सियासी समीकरण या तालमेल बन रहा है? हालांकि अंतिम फैसला पूरी तरह से एकनाथ शिंदे के हाथ में है, लेकिन इस बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर नई बहस छेड़ दी है।



