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कर्नाटक कांग्रेस में घमासान: रामलिंगा रेड्डी के बाद अब केएच मुनियप्पा ने भी बगावती सुर अपनाए, विभाग संभालने से किया इनकार

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मुख्य बातें 
  • वरिष्ठ दलित नेता और मंत्री केएच मुनियप्पा ने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग का प्रभार लेने से साफ मना किया।

  • इससे पहले एक और वरिष्ठ मंत्री रामलिंगा रेड्डी भी विभागों के बंटवारे से नाराज होकर इस्तीफे की घोषणा कर चुके हैं।

  • मुनियप्पा ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है।

  • अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे प्रियंक खरगे और सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र सिद्धारमैया को मिले प्रभावशाली विभागों से वरिष्ठ नेता असंतुष्ट हैं।

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वरिष्ठता की अनदेखी से नाराज मुनियप्पा

चेन्नई 5जून: कर्नाटक में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली नई कांग्रेस सरकार के गठन को अभी कुछ ही समय हुआ है, लेकिन सरकार के भीतर असंतोष की आग खुलकर सामने आने लगी है। लगातार दो वरिष्ठ मंत्रियों की नाराजगी ने कांग्रेस आलाकमान की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

बेंगलुरु ग्रामीण जिले के देवनहल्ली में शुक्रवार को मीडिया से बातचीत करते हुए सात बार के पूर्व सांसद और वर्तमान मंत्री केएच मुनियप्पा ने घोषणा की कि वह उन्हें आवंटित किए गए खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग का कार्यभार नहीं संभालेंगे।

“मैं खाद्य विभाग का प्रभार नहीं लूंगा। जब तक पार्टी हाईकमान इस मामले को गंभीरता से नहीं देखता और उचित निर्णय नहीं लेता, तब तक मैं मंत्रालय से दूरी बनाए रखूंगा। पार्टी नेतृत्व को वरिष्ठ नेताओं की गरिमा और अनुभव का सम्मान करते हुए विभागों के आवंटन में हुई गलती को जल्द से जल्द सुधारना चाहिए।” — केएच मुनियप्पा, वरिष्ठ कांग्रेस नेता

पूर्व केंद्रीय मंत्री रह चुके मुनियप्पा ने अपने लंबे राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि विभागों का बंटवारा करते समय वरिष्ठता को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि पार्टी नेतृत्व की यह जिम्मेदारी है कि वह ऐसा फैसला करे जिससे संगठन और जनता दोनों का भरोसा बना रहे।

‘मल्लिकार्जुन खरगे निभाएं अभिभावक की भूमिका’

मुनियप्पा ने विशेष रूप से कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से इस संकट को सुलझाने के लिए हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने कहा कि खरगे को एक अभिभावक की भूमिका निभाते हुए सभी नेताओं को साथ लेकर चलना चाहिए था।

मुनियप्पा ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपनी नाराजगी से पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को अवगत करा दिया है। इस सिलसिले में उन्होंने:

▪️राहुल गांधी▪️कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला▪️केसी वेणुगोपाल▪️पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया▪️मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार

इन सभी नेताओं से मुनियप्पा ने बातचीत की है और उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही आलाकमान की ओर से कोई सकारात्मक और सम्मानजनक समाधान निकाला जाएगा।

वंशवाद और ‘महत्वपूर्ण विभागों’ को लेकर सुलग रही है चिंगारी

हालांकि मुनियप्पा ने सीधे तौर पर किसी व्यक्ति विशेष की आलोचना करने से बचते हुए इसे ‘आवंटन की गलती’ बताया, लेकिन कांग्रेस के गलियारों से छनकर आ रही खबरें कुछ और ही बयां कर रही हैं।

सूत्रों के मुताबिक, कई वरिष्ठ नेता इस बात से भीतर ही भीतर बेहद नाराज हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे प्रियंक खरगे और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र सिद्धारमैया को अपेक्षाकृत अधिक प्रभावशाली और मलाईदार जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। वहीं दूसरी तरफ, दशकों से पार्टी को सींचने वाले वरिष्ठ नेताओं को उनकी अपेक्षाओं के विपरीत दोयम दर्जे के विभाग थमा दिए गए हैं।

मुनियप्पा की नाराजगी कांग्रेस के लिए क्यों है बड़ा झटका?

कर्नाटक कांग्रेस में केएच मुनियप्पा का कद बेहद ऊंचा है। उनकी नाराजगी को पार्टी हल्के में नहीं ले सकती, इसके पीछे कई अहम कारण हैं:

पैमाना विवरण
राजनीतिक अनुभव मुनियप्पा 7 बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं और केंद्र की यूपीए (UPA) सरकार में केंद्रीय मंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
सामाजिक समीकरण वह कर्नाटक में दलित समुदाय के सबसे प्रभावशाली और बड़े चेहरों में से एक हैं।
पारिवारिक रसूख उनकी जमीनी पकड़ मजबूत है और उनकी बेटी एम. रूपकला शशिधर भी राजनीति में सक्रिय रहते हुए केजीएफ (KGF) सीट से दो बार की विधायक हैं।

निष्कर्ष: कर्नाटक कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं

रामलिंगा रेड्डी के इस्तीफे के ड्रामे के ठीक बाद मुनियप्पा के इस कदम ने यह साबित कर दिया है कि नई सरकार में असंतोष की जड़ें काफी गहरी हैं। यह केवल किसी एक नेता की नाराजगी नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर पुराने बनाम नए और ‘पुत्रों को प्राथमिकता’ दिए जाने के खिलाफ एक बड़ा विरोध है।

अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और दिल्ली में बैठा कांग्रेस हाईकमान इन नाराज दिग्गजों को शांत करने के लिए क्या कदम उठाता है। यदि समय रहते इस असंतोष को नहीं दबाया गया, तो कर्नाटक में कांग्रेस सरकार की स्थिरता पर शुरुआती दौर में ही सवाल खड़े होने लगेंगे।

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