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खून से सनी रियल इस्पात की लापरवाही: विस्फोट में 6 मजदूरों की मौत, मुख्यमंत्री के निर्देश परकिल्न-01 सील

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रायपुर/बलौदाबाजार। बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के धौराभाठा स्थित मेसर्स रियल इस्पात एण्ड एनर्जी प्रा. लि. में गुरुवार को हुआ भीषण हादसा प्रबंधन की आपराधिक लापरवाही का नतीजा निकला। 900 डिग्री सेल्सियस की खौलती राख की चपेट में आने से 6 श्रमिकों की दर्दनाक मौत और 5 के गंभीर रूप से झुलसने के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कड़ा रुख अपनाया है। शासन के निर्देश पर औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए फैक्ट्री के किल्न क्रमांक-01 के संचालन और मेंटेनेंस पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है।

मौत का चेंबर: बिना शटडाउन उतार दिया मौत के मुँह में

प्रारंभिक जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। 22 जनवरी की सुबह जब डस्ट सेटलिंग चेंबर के दूसरे तल पर काम चल रहा था, तब चेंबर के भीतर का तापमान 850 से 900 डिग्री सेल्सियस था। प्रबंधन ने किल्न को बंद (शटडाउन) किए बिना ही मजदूरों को पोकिंग के काम में लगा दिया। अचानक हुए विस्फोट और गर्म राख की बौछार ने मजदूरों को संभलने का मौका तक नहीं दिया।

जांच में खुली पोल: न सुरक्षा उपकरण, न ट्रेनिंग

विभागीय निरीक्षण में सुरक्षा मानकों के चीथड़े उड़े मिले। जांच रिपोर्ट के अनुसार:

SOP का उल्लंघन: बिना हाइड्रोलिक स्लाइड गेट बंद किए जोखिमपूर्ण कार्य कराया गया। सुरक्षा किट का अभाव: मजदूरों के पास न हीट रेसिस्टेंट एप्रन थे, न ही हेलमेट और जूते। अनुमति में खेल: बिना वैध वर्क परमिट के अत्यंत खतरनाक जोन में काम कराया जा रहा था।मेंटेनेंस में जीरो: मशीनरी के नियमित रखरखाव में भी भारी कमी पाई गई।

कठोर कार्रवाई: ‘इमिनेंट डेंजर’ घोषित, वेतन देना होगा

प्रशासन ने किल्न-01 में विनिर्माण प्रक्रिया को ‘इमिनेंट डेंजर’ (आसन्न खतरा) की श्रेणी में रखते हुए कारखाना अधिनियम, 1948 की धारा 40(2) के तहत काम रोक दिया है। सख्त आदेश दिए गए हैं कि जब तक सुरक्षा मानकों का प्रमाण नहीं दिया जाता, काम बंद रहेगा। साथ ही, प्रतिबंध की अवधि के दौरान सभी प्रभावित श्रमिकों को पूरा वेतन और भत्ता देना अनिवार्य होगा।

“श्रमिकों की सुरक्षा से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नियमों की अनदेखी करने वाले कारखानों पर ऐसी ही कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।”

— मुख्य कारखाना निरीक्षक, छत्तीसगढ़

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