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सियासत का वार: राहुल गांधी को कंगना रनौत की ‘शॉकिंग’ सलाह – “अटल जी बनना है तो BJP जॉइन करो!”

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Kangna Ranaut :  भाजपा सांसद और मंडी से नवनिर्वाचित सांसद कंगना रनौत ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को एक ऐसी राजनीतिक सलाह दी है, जिसने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है।

दरअसल, राहुल गांधी ने हाल ही में केंद्र सरकार पर आरोप लगाया था कि उन्हें विदेशी गणमान्य व्यक्तियों, जैसे कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, से मिलने नहीं दिया जाता, जबकि पुराने समय में अटल बिहारी वाजपेयी के दौर में ऐसी परंपराएं नहीं थीं।

कंगना का तीखा पलटवार: “आप भी अटल जी बन सकते हैं, बस…”
समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कंगना रनौत ने राहुल गांधी की तुलना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी देश की धरोहर थे और उन पर पूरे राष्ट्र को गर्व था। इसके विपरीत, कंगना ने राहुल गांधी की देश के प्रति भावनाओं और गतिविधियों को “काफी संदिग्ध” बताया।

कंगना ने तंज कसते हुए कहा, “भगवान ने आपको जीवन दिया है, आप भी महान बन सकते हैं, बस रास्ता बदल लीजिए।” उन्होंने सीधे तौर पर राहुल गांधी को सलाह देते हुए कहा:

“आप भी अटल जी बन सकते हैं, बस बीजेपी जॉइन कर लीजिए।”

कंगना ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के खिलाफ होने वाली साजिशों—चाहे वे दंगे हों या देश के टुकड़े करने की बातें—उनमें राहुल गांधी का रुख साफ नहीं दिखता।

राहुल की शिकायत: “विदेशी मेहमानों से दूर क्यों रखा जाता है?”
यह विवाद तब शुरू हुआ जब राहुल गांधी ने यह शिकायत की कि सरकार और विदेश मंत्रालय जानबूझकर विपक्ष के नेता को विदेशी मेहमानों से दूर रखते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि अटल बिहारी वाजपेयी और डॉ. मनमोहन सिंह की सरकारों के समय, विदेशी गणमान्य अतिथियों का विपक्ष के नेताओं से मिलना एक शिष्टाचार और स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा का हिस्सा होता था।

राहुल गांधी का तर्क है कि लोकतंत्र में सिर्फ सरकार ही नहीं, विपक्ष भी देश का प्रतिनिधित्व करता है, और विदेशी मेहमानों के सामने विपक्ष का नजरिया रखना जरूरी है।

थरूर बोले: “विपक्ष से मिलना अच्छा संकेत है”
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी इस बहस में राहुल गांधी का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विदेशी मेहमानों का विपक्ष से मिलना एक अच्छा संकेत माना जाता है।

यह बयान अब राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है कि क्या यह सलाह है या फिर एक सीधा राजनीतिक व्यंग्य।