जोहान्सबर्ग/नई दिल्ली 19 अक्टूबर 2026:माइनिंग और मेटल क्षेत्र की प्रमुख कंपनी वेदांता लिमिटेड ने साउथ अफ्रीका में अपने जिंक कारोबार को गति देने के लिए 60 करोड़ डॉलर (करीब 600 मिलियन डॉलर) के बड़े निवेश का ऐलान किया है। इस भारी-भरकम निवेश का मुख्य उद्देश्य अपनी जिंक उत्पादन क्षमता को दोगुना करके सालाना 5 लाख टन तक पहुँचाना है।
Advt

इस विस्तार के ज़रिए वेदांता का लक्ष्य भारत और साउथ अफ्रीका के अपने संयुक्त परिचालन से सालाना 30 लाख टन (3 मिलियन टन) जिंक उत्पादन के वैश्विक आंकड़े को छूना है।
गाम्सबर्ग माइन प्रोजेक्ट और ऐतिहासिक निवेश
यह नया निवेश साउथ अफ्रीका के नॉर्दर्न केप प्रांत स्थित वेदांता जिंक इंटरनेशनल (VZI) की फ्लैगशिप गाम्सबर्ग खदान (Gamsberg Mine) में किया गया है। यह प्रोजेक्ट साल 2018 के ‘साउथ अफ्रीका इन्वेस्टमेंट कॉन्फ्रेंस’ के दौरान किए गए 21 अरब रैंड (लगभग 1.5 अरब डॉलर) के निवेश वादे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। वेदांता के अनुसार, यह पिछले एक दशक में साउथ अफ्रीका के खनन (माइनिंग) क्षेत्र में हुए सबसे बड़े निवेशों में से एक है।
भारत और साउथ अफ्रीका को लेकर वेदांता का मास्टर प्लान
कंपनी ने अपनी वैश्विक उत्पादन रणनीति को पूरी स्पष्टता के साथ सामने रखा है:
-
भारत (हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड): सालाना 20 लाख टन जिंक उत्पादन का लक्ष्य।
-
साउथ अफ्रीका (वेदांता जिंक इंटरनेशनल): सालाना 10 लाख टन जिंक उत्पादन का लक्ष्य।
इसी दीर्घकालिक योजना के तहत गाम्सबर्ग खदान के दूसरे चरण (Phase 2) के विस्तार का आधिकारिक उद्घाटन किया गया। उद्घाटन समारोह में साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा और वेदांता की डायरेक्टर प्रिया अग्रवाल-हेब्बर विशेष रूप से उपस्थित रहे।
राष्ट्रपति रामाफोसा और वेदांता नेतृत्व का बयान
-
सिरिल रामाफोसा (राष्ट्रपति, साउथ अफ्रीका): उन्होंने वेदांता के इस निवेश की सराहना करते हुए कहा कि सरकार कंपनी की बुनियादी और व्यापारिक जरूरतों को पूरा करने के लिए हर संभव सहयोग प्रदान करेगी।
-
प्रिया अग्रवाल-हेब्बर (डायरेक्टर, वेदांता): उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट साउथ अफ्रीका के आर्थिक विकास के प्रति वेदांता की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। कंपनी का इरादा इस क्षेत्र को एक अत्याधुनिक और बड़े इंडस्ट्रियल हब के रूप में विकसित करने का है।
वैश्विक बाजार में क्यों बढ़ रही है जिंक की मांग?
दुनियाभर में कंस्ट्रक्शन (निर्माण), ऑटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग जैसे उद्योगों के तेजी से बढ़ने के कारण जिंक की मांग में काफी उछाल आया है। स्टील को जंग (rust) से बचाने और उसकी म्याद व मजबूती बढ़ाने के लिए की जाने वाली ‘गैल्वनाइजेशन’ (Galvanization) प्रक्रिया में जिंक एक अति-आवश्यक घटक के रूप में इस्तेमाल होता है।




