नई दिल्ली 07 अक्टूबर 2026: नई दिल्ली में मंगलवार को विपक्षी सांसदों के मार्च और प्रदर्शन के दौरान हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। संसद भवन परिसर से निर्वाचन सदन की ओर कूच कर रहे विपक्षी सांसदों को पुलिस ने रास्ते में ही रोककर हिरासत में ले लिया था। दोपहर तक ऐसा लग रहा था कि विपक्ष का मार्च और धरना पूरी तरह समाप्त हो चुका है, लेकिन राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के एक अचानक उठाए कदम ने पूरे घटनाक्रम की तस्वीर बदलकर रख दी।

📍 मार्च की शुरुआत और सांसदों की हिरासत
सुबह करीब 11 बजे विपक्षी सांसदों ने संसद भवन परिसर से निर्वाचन सदन (चुनाव आयोग मुख्यालय) की ओर नारेबाजी करते हुए मार्च निकाला। हालांकि, गंतव्य से महज 200 मीटर पहले पुलिस ने सुरक्षा का कड़ा पहरा लगाकर उन्हें रोक दिया। इसके बाद पुलिस ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी, डेरेक ओब्रायन, महुआ मोइत्रा और माकपा सांसद जॉन ब्रिटास समेत कई प्रमुख नेताओं को हिरासत में ले लिया और बसों में बैठाकर अन्य स्थानों पर ले जाया गया।
📍राहुल-प्रियंका का अचानक फैसला: आकाशवाणी परिसर में प्रवेश
जब अधिकांश नेता हिरासत में ले लिए गए, तब प्रियंका गांधी पुलिस की एक बस में बैठ गई थीं। हालांकि, राहुल गांधी से चर्चा के बाद वह बस से नीचे उतर आईं। अपराह्न करीब 12:20 बजे दोनों नेता अचानक संसद मार्ग पर स्थित आकाशवाणी भवन के स्वागत कक्ष (गेट नंबर 3) की ओर बढ़े।
गेट पर तैनात कर्मचारियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, जिससे कुछ देर के लिए तनाव की स्थिति बन गई। इसके बावजूद राहुल गांधी अपने सुरक्षाकर्मियों के साथ अंदर दाखिल हो गए। इसके कुछ ही देर बाद, करीब 12:30 बजे प्रियंका गांधी भी उनके साथ शामिल हो गईं और दोनों गेट नंबर 4 के पास एक पेड़ के नीचे धरने पर बैठ गए।
📍आकाशवाणी परिसर का माहौल और अन्य नेताओं की वापसी
दोनों नेताओं के अंदर बैठते ही परिसर में मौजूद कर्मचारी और लोग उत्सुकतावश इकट्ठा होने लगे। कई लोगों ने राहुल गांधी के साथ तस्वीरें लीं, जबकि कुछ लोग छत पर चढ़कर घटनाक्रम देखने लगे, जिन्हें बाद में पुलिस ने नीचे उतारा।
इस कदम से कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं में नई हलचल पैदा हो गई:
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शीर्ष नेताओं का आगमन: दोपहर लगभग 12:45 बजे कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल और पवन खेड़ा मौके पर पहुंचे। इसके साथ ही प्रणीति शिंदे, दीपेंद्र हुड्डा, चरणजीत सिंह चन्नी और श्रीनिवास बी.वी. भी वहां जुट गए।
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सांसदों की वापसी: हिरासत से रिहा होने के बाद माकपा सांसद जॉन ब्रिटास समेत कई अन्य नेता दोबारा प्रदर्शन स्थल पर पहुंच गए।
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सुरक्षा अधिकारियों की वार्ता: नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा मौके पर पहुंचे और नेताओं से बातचीत की, जिसके बाद अन्य नेताओं को भी परिसर में प्रवेश की अनुमति दी गई।
📍धरने के बीच खान-पान की व्यवस्था
परिसर में मौजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए पास के नीति आयोग के बाहर और पटेल चौक से जलपान की व्यवस्था की गई। आलू चिप्स, भुजिया, चॉकलेट, पानी की बोतलें, कोल्ड ड्रिंक्स और डाइट कोक मंगाए गए। प्रदर्शन खत्म होने के बाद यूथ कांग्रेस और सेवा दल प्रमुख श्रीनिवास बी.वी. को खुद परिसर से खाली पैकेट और कचरा हटाते हुए देखा गया।
📍राहुल गांधी का कड़ा संदेश: “हम लोकतंत्र की रक्षा के लिए खड़े हैं”
अपराह्न करीब 2:30 बजे राहुल गांधी ने परिसर की जाली के बीच से पत्रकारों के माइक्रोफोन के जरिए मीडिया को संबोधित किया।
केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोलते हुए उन्होंने कहा:
“भाजपा क्या कहती है, मुझे इसकी परवाह नहीं है। मैं लोकतंत्र की रक्षा के लिए यहां खड़ा हूं। देश के साथ जो किया गया है, वह देशद्रोह है। प्रधानमंत्री मोदी हों, शाह हों, आरएसएस प्रमुख हों या ज्ञानेश कुमार, किसी को बख्शा नहीं जाएगा।”
राहुल और प्रियंका गांधी के इस रणनीतिक कदम ने न केवल पुलिस और प्रशासन की योजनाओं को चकमा दिया, बल्कि खत्म दिख रहे विपक्षी विरोध प्रदर्शन को फिर से एक बड़े सियासी घटनाक्रम में तब्दील कर दिया।



