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ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के लिए लागू होंगे नए नियम: शिकायत मिटाने की मनमानी पर लगेगी लगाम, रैंकिंग फैक्टर और 30 दिनों का डिस्काउंट प्राइस बताना होगा अनिवार्य

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नई दिल्ली  5 अक्टूबर 2026 Ecommerce Rules 2026, । देश में तेजी से बढ़ रहे ई-कॉमर्स कारोबार और ग्राहकों की बढ़ती समस्याओं को देखते हुए सरकार ने ‘लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटीज) अमेंडमेंट रूल्स, 2026’ का ऐलान किया है। ये नए नियम 1 जनवरी, 2027 से प्रभावी होंगे। इनका मुख्य उद्देश्य ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की मनमानी पर रोक लगाना और ग्राहकों को अधिक पारदर्शिता व अधिकार देना है।

नए नियमों से ग्राहकों को क्या मिलेंगे फायदे?

  • शिकायत का लिखित रिकॉर्ड: ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अब ग्राहक की शिकायत को सिस्टम से गायब नहीं कर सकेंगे। शिकायत अधिकारी को 48 घंटे के भीतर रसीद/कॉपी देनी होगी और 1 महीने के अंदर समस्या का समाधान करना होगा।

  • पारदर्शी सर्च रैंकिंग: प्रॉडक्ट्स की सर्च रैंकिंग किस आधार पर तय हो रही है, प्लेटफॉर्म्स को इसके मुख्य कारणों की जानकारी देनी होगी।

  • स्पॉन्सर्ड लिस्टिंग की पहचान: विज्ञापनों और स्पॉन्सर्ड प्रॉडक्ट्स को साफ तौर पर मार्क करना अनिवार्य होगा।

  • डिस्काउंट का सच: कीमत में कटौती का विज्ञापन देने से पहले कंपनियों को वह न्यूनतम कीमत (Minimum Price) दिखानी होगी, जिस पर वह प्रॉडक्ट पिछले 30 दिनों में बेचा गया था।

क्यों पड़ी बदलाव की जरूरत? उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे के अनुसार, 2019 में कानून बनने और 2020 में नियम लागू होने के बाद से ई-कॉमर्स सेक्टर में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। इसके साथ ही राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन पर आने वाली शिकायतों का एक बड़ा हिस्सा ई-कॉमर्स से जुड़ गया है।

मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, ई-कॉमर्स से जुड़ी शिकायतें वर्ष 2021 में 2,24,592 थीं, जो 2025 में 127.6% बढ़कर 5,11,198 हो गईं। वहीं, 2026 में केवल जनवरी से अगस्त के बीच ही 4,78,018 शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं।

सरकार का स्पष्ट कहना है कि ई-कॉमर्स कंपनियां सिर्फ ‘मध्यस्थ’ (Intermediaries) होने का बहाना बनाकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती हैं। नए नियमों से ग्राहकों को अपनी शिकायतों का औपचारिक ट्रैक रिकॉर्ड मिलेगा और खरीद प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी।