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नाम एक, काम तमाम:  पुलिस ने ‘हमशक्ल’ के चक्कर में निर्दोष को बना दिया मुजरिम!

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इन्दौर। वाह रे इंदौर पुलिस! आपकी पारखी नजरों को सलाम। मुम्बई की फिल्मों में अक्सर ‘जुड़वा’ और ‘हमशक्ल’ की कहानियां हिट होती हैं, लेकिन इंदौर की परदेशीपुरा पुलिस ने तो असल जिंदगी में ही वह करिश्मा कर दिखाया जिसे देखकर खुद यमराज भी कन्फ्यूज हो जाएं कि किसकी फाइल उठानी है।

क्या है पूरा ‘कॉमेडी ऑफ एरर्स’? मामला हत्या के प्रयास का था, जिसमें असली आरोपी था रोहित पिता विजय यादव। कोर्ट ने कहा- “उसे पकड़ कर लाओ।” पुलिस निकली और बस ‘नाम’ और ‘बाप का नाम’ मिलते ही एक मासूम रोहित को दबोच लिया। शायद पुलिस को लगा होगा कि नाम ही काफी है, इंसान तो बदलता रहता है!

ओम vs ‘R’: जब टैटू ने खोल दी पोल अदालत में जब ‘नकली’ रोहित को पेश किया गया, तो वकील नवाजिश खान ने पुलिस की इस ‘क्रिएटिविटी’ की हवा निकाल दी। कोर्ट ने जब रिकॉर्ड खंगाला तो खेल खुल गया:

  • असली आरोपी: दाहिने हाथ पर ‘ओम’ गुदा है, छाती पर तिल है और उम्र का पड़ाव 2002 वाली पीढ़ी का है।

  • पकड़ा गया बेचारा: हाथ पर अंग्रेजी में ‘R’ लिखा है, छाती एकदम साफ (नो तिल), और पैदाइश 1990 की है।

अपर सत्र न्यायाधीश सोनल पटेल जी भी दंग रह गईं कि पुलिस ने “इंसान पकड़ा है या रैंडम आधार कार्ड?”

कोर्ट की फटकार और पुलिस की ‘क्लास’ माननीय कोर्ट ने पुलिस के इस ‘हैरतअंगेज’ कारनामे पर जमकर लताड़ लगाई। जज साहिबा ने साफ कहा कि सिर्फ नाम एक होने से कोई मुजरिम नहीं हो जाता। कोर्ट ने निर्दोष को तो आजाद कर दिया, लेकिन परदेशीपुरा थाना प्रभारी को तीन दिन का अल्टीमेटम दिया है कि “बताइए, ये जादुई गिरफ्तारी कैसे हुई?”

अब देखना यह है कि तीन दिन बाद पुलिस क्या स्पष्टीकरण देती है। कहीं यह तो नहीं कह देंगे कि “साहब, हम तो डिजिटल इंडिया में सिर्फ की-वर्ड सर्च कर रहे थे!”

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